” इश्क़-ऐ-जुनून “

आहिस्ता आहिस्ता वो हमें कुछ यूं भा गए,
पहले वो नजरों में ओर फिर दिल में समा गए…!

उनके नूर का सुरूर हमपे कुछ यूं चढ़ा कि,
पहली ही नज़र से उनके इश्क़ में हम गिरफ्तार हो गये…!

आहिस्ता आहिस्ता वोे हमारे मुस्कुराने की वजह हो गये
पहले मैं ओर तुम से हम और फिर दो दिल एक जान हो गये…!

अब तो ना चैन मिलता हैं ना ही सुकून
दिल भी बस यही बोलता की हैं ये इश्क़- ऐ – जूनून…!

Shabdsiyapaaa©

OnlyKabir…✍

Inspire from the ghazal “Raftaa Raftaa Woh Meri Hasti Ka Saaman Ho Gaye

Written by :- ” Tasleem Fazil Sahab “

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