“Ab mat poochnaa kaun ho tum”

Dil ki kitaab Mein likhe kuch alfaaz,

Aur un alfaazon ki dhadkan ho tum,

Ab mat poochna kaun ho tum…?

दिल की किताब में लिखे कुछ अल्फ़ाज,
औऱ उन अल्फ़ाज़ों की धड़कन तुम हो,
अब मत पूछना कौन हो तुम…?

Shabdsiyapaaa©

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“लम्हें”

वो लम्हा ही क्या जिसमें तुझसे झगड़ा ना हो,

क्योंकि हर लम्हें में तेरा ज़िक्र ज़रूरी हैं मेरे लिए…!

Shabdsiyapaaa©

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